Monday, 17 June 2019

बचपन की सैर कराती बाल कवित़ाओ का संग्रह

बचपन की सैर कराती बाल कवित़ाओ का संग्रह

कृति-अम्मा जरा बताओ, बाल कविताएँ
लेखक- डॉ हरीश निगम, सतना
प्रकाशक- जेटीएस पब्लिकेशन, नईदिल्ली
समीक्षा -अनिल अयान, सतना।

पूरे देश मे जहां बाल साहित्यिक कृतियों का अकाल सा है उस दरमियां डा हरीश निगम की स्मृति शेष अंक का यह संग्रह भीषण गर्मी मे वादियों की ठंडक देने वाला है। सतना मे बाल कविताओं मे थोडा बहुत काम डॉ वेद प्रकाश सिंह प्रकाश जी ने भी किया, हरीश निगम जी की बाल कविताएं जो नवभारत टाइम्स मे नियमित प्रकाशित होती रहीं उनको सहेजने का काम मरणोपरांत उनके परिवारजनों ने इस पुस्तक के रूप मे किया यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध होगा। इस संग्रह मे बचपन की हर उस अंगडाई को हरीश निगम जी ने कविता के बंधों मे माला की तरह पिरोया है जिसे हम सामान्यतः नजरंदाज कर देते है।उनके जीवित रहते भी उनके कई बालकविताओं का संग्रह आये हैं। किंतु यह इसलिए भी सर्वश्रेष्ठ है क्योकि यह उनकी अनुपस्थिति मे आया है और उनकी उपस्थिति की महक देता रहेगा।
इस संग्रह मे अर्धशतकीय बाल गीत हैं जो विभिन्न विषयों जैसे अम्मा की बातचीत, चंदामामा, सडकें, पंछी, सर्दी, जाडे का मौसम, दीवाली, सूरज, शिशुगीत, पानी, सुबह, वर्षा, चूहा चुहिया मंहगाई, छुट्टियां, गर्मी, दादा जी, बंदर मामा, नया साल, होली विषयों को समेटा गया है।
सभी गीत बाल मन की जिज्ञासाओं से उपजे हैं। कई सवाल और उनके सवाल देते ये गीत सरल, सहज और गेयता लिए हुए हैं, इन पर बच्चे अभिनय भी कर सकते है प्री प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के लिए बच्चों के जुबां मे जल्दी ही आ जाने वाले ये गीत सतना की माटी और सतना के लाल हरीश निगम की लेखनी और भावों की सुगंध बिखेरते हुए पाठक को मंत्र मुग्ध करते है,  पुस्तक के शीर्षक के गीत का बंध देखे-।।नानी इतनी ढेर कहानी, और कुए जी इतना पानी, रोज कहां से पाते हैं, अम्मा जरा बताओ तो।। या फिर ।।आई आई गर्मी आई, पूंछ दबाए भगी रजाई, ठंडा पानी लगे मिठाई, लू मैडम ने डांट लगाई।। इन गीतों मे छंद बद्धता भी है, गेयता भी है, मन का संगीत भी है, लेखक के कलम की जादुई सम्मोहित करने वाली कल्पना भी है। इस पुस्तक को पढते हुए इस बात का क्षोभ जरूर होता है कि हरीश सर की ये कृतियां ही हमारी साथी है। वो अगर होते तो और ज्यादा बाल रचनाएं हमें पढने को मिलती, किंतु उनका यह संकलन बच्चो और बूढों दोनों को बचपन की सैर कराने मे सफल सिद्ध होता है। 

अनिल अयान, सतना

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