दयाराम वर्मा कृत उपन्यास सियांग के उस पार लेखक के जीवन से उपजा संस्मरणात्मक शैली का उपन्यास है। इसमें यथार्थ की धरातल में पात्रों के माध्यम से कल्पनाओं के आभूषण से सजाया गया है। इस उपन्यास में सियांग नदी और सियांग घाटी के प्राकृतिक सौंदर्य का मनोहारी चित्रण मिलता है। इस उपन्यास की मुख्य कथा एक असीम प्रेम कथा है जो विक्रम और निमसी के बीच पनपती है। यह प्रेम कथा समाजिक रूप से अधूरी होते हुए भी मनोवैज्ञानिक रूप से पूर्ण कही जा सकती है। इस उपन्यास में अरुणाचल की धरती,घाटियों,पहाडि़यों, मौसम, रहन सहन, वहां के बौद्ध धर्म के अनुयाइयों के जीवन दर्शन को पात्रों के माध्यम से बारीकी से उजागर किया गया है। इस उपन्यास में असीम प्रेम, मित्रता का मजबूत संबंध, वहां के रहवासियों का यादगार अभिभावकत्व, सेना के जवानों और अधिकारियों का आपस में नियम कानून के परे मानवीय संबंधों इंद्रधनुषीय रंग बिखरा हुआ है।इस उपन्यास की भाषा में अरुणाचल में बोली जाने वाली स्थानीय बोली का सम्मिश्रण है जो पाठकों को अपनी अन्भिग्यता को जानकार के रूप में बदलने में मदद करता है। उपन्यास के अंदर वायुयान उड़ानो, मौसम विज्ञान की शब्दावली का भी उपयोग किया गया है, विभिन्न जगहों में अंग्रेजी के वाक्यों का प्रयोग भी है। जो उपन्यास की आवश्यकता भी है।
उपन्यास में दो प्रमुख स्थान हैं जो सियांग नदी के दो तटों पर बसे हैं जिनका नाम क्रमशःमेक्लिंग और नियांमदिंग है। मैक्लिंग में वायुसेना का एयर बेस डेट स्टेशन है जो पहाडी इलाके में बना वायुयानों के उतरने का स्थान है। उपन्यास का नायक विक्रम एयरफोर्स में इसी डेट स्टेशन में वायुसेना के मौसम विशेषज्ञ के रूप में पोस्टिंग में आता है। इसकी नायिका नियामदिंग की मेंबा कबीले की खूबसूरत निमसी है जो विक्रम के संपर्क में मेक्लिंग के स्थानीय रहवासी डे की वजह से आती है। उसके और विक्रम के मिलने की सबसे बड़ी वजह यह भी होती है कि विक्रम की सूरत देबांग से मिलती है जो कुछ वर्ष पहले सियांग नदी के माइक्रोहाइड्रल प्रोजेक्ट में बतौर इंजीनियर आया था और निमसी की बड़ी बहन के साथ उसका प्रेम जब परवान चढ़ा तो शादी के वायदों के बावजूद वह अधूरा रह गया। देवांग के विछॊह में मिनी अपना मानसिक संतुलन खोकर बीमार हो गई। निमसी अपनी बड़ी बहन को सही करने के लिए डे के सहयोग से विक्रम के संपर्क में आती है। वह धीरे धीरे उसके प्रेम में बंधती चली जाती है।
विक्रम को पहले ही दिन से उसके पुराने साथी, मेक्लिंग के बस्ती के लोग, मान्सी नाम की अमीर व्यवसायी, म्योंग दीदी जो हथकरघा उद्योग की सुपरवाइजर थी देव का दूसरा अवतार मानने लगे थे, डे जो मान्सी के वीडीयों हाउस में वीडियो चलाता है, उसकी मदद से विक्रम और निमसी का प्रेम बढ़ता है, वास्तविक रूप से यह प्रेम मिनी और देव की प्रेम कथा से मिनी को मुक्त करके सही करने के उद्देश्य से प्रारंभ होता है किंतु समय गुजरने के साथ निममी निम्मी, और विक्रम विक्की के रूप में नजदीक आजाते हैं, निमसी के निवेदन में विक्रम उसके साथ नियामदिंग,सियांग के उस पार मिनी से मिलने जाता है, इसमें उसके अधिकार मेहनोत्र सर, आर्मी बेस कैंप के राथौड़ सर उसकी काफी मदद करते हैं। मिनी की मौत विक्की के मिलन के बाद हो जाती है,क्योंकि उसे लगता है कि देव उसे मिल गया है, कबीले वालों को यह भ्रम हो जाता है कि विक्की के शरीर में देव की आत्मा ने मिनी को अपनेसाथ ले गई और अब वह निमसी के परिवार को भी नहीं छोड़ेगी, कबीले के मुखिया के आदेश से निमसी और विक्रम अलग हो जाते हैं, विक्रम दो बारा इस पोस्टिंग में अवसाद की वजह से नहीं जाता। विक्रम एयर फोर्स की नौकरी को छोड़ कर देवांग के नाम दूसरा जीवन प्रारंभ करता है, वह देवांग की तरह माइक्रो हाइड्रल प्लांट में इंजीनियर बनकर दोबारा मेक्लिंग जाता है। निमसी मिनी नाम से आगे की पढ़ाई करके वहीं मास्टर हो जाती है।
देवांग उर्फ विक्की जब मेक्लिंग जाता है तो वह मिनी को ढ़ूढ़ने के लिए बस्ती में जाता है उसकी मुलाकात निमसी उर्फ मिनी के बेटे से होती है।उपन्यास का प्रारंभ यहीं से होता है। वह उसके घर में अपने वही पुराने कपडे और हैट देखता है जो उसने निमसी को अंतिम मुलाकात के समय दिया था। उसे यकीन हो जाता है कि वही निमसी है। निमसी उसे ढ़ूढते हुए जब माइक्रो हाइड्रल प्रोजेक्ट के आफिस जाता है तो उसे विक्रम की डायरी मिलती है उसको पढ़ने के बाद उसे पता चलताहै कि वो देवांग नहीं विक्रम है। दोनों कुछ घंटों की मुलाकात में अपने बिछड़ने के बाद की जिंदगी का सारांस एक दूसरे को बता देते हैं। यही से इस उपन्यास का उपसंहार होता है।
इस उपन्यास में डेट कैंप के शंकरन,प्रभु, लोकनाथ, डेविड़ सर, और लोकल कर्म चारी बरुआ, डेविड़ सर के बाद सिन्हा सर का किरदार,शिल्पकेंद्र की पर्यवेक्षक मैड़म डाबा, जैसे सह पात्र उपन्यास को गति देते हैं। उपन्यास ११ भागों में लिखा गया है। इसमें सियांग नदी के हैंगिग पुल, डेट स्टेशन और उसके आस पास की प्राकृतिक स्थितियां, जंगलों में जंगली जानवर मिथुन, जंगलों में अंधेरों में जोकों का सम्राज्य, वौद्ध धर्म स्थल गोम्पा और उसके अनुयाइयों का रहन सहन, वहां पर पहाडो़ं में बसे गांव, घरों की बनावट, बांस में चावल का पकाना, प्रमुख विशेषता है। इस उपन्यास में छद छद्म, बैर,चालाकी, फरेबी जैसे किरदार नहीं है।
इस उपन्यास में भाषा गत परिवर्तन अरुणाचल की मांग थी सर को सार, मीटर को मीतर,आदि. इस उपन्यास में शुरुआत के ५० पृष्ठ में अरुणाचल की सियांग घाटी प्राकृतिक सौंदर्य और उनके रहवासियों का चित्रण है, १७५ पृष्ठ से २२५ पॄष्ठ तक निमसी और विक्रम की पैदल यात्रा है जो सियांग के इस पार से उस पार जाने की तीन दिन की यात्रा का वर्णन है। पूरा उपन्यास एक उपन्यास कम और संस्मरण ज्यादा है। पढ़ते पढ़ते ऐसा महसूस होता है कि विक्रम खुद दयाराम वर्मा ही हैं। जिन्होने अपने जीवन के अनुभवोंको ८० के दशक से उठाकर २०१८ के दशक में पाठकों के सामने लाने की कोशीश की है। अरुणाचल की उस समय पर यातायात और विद्युत समस्याएं, मानवीय प्रेम की भौगोलिक स्थितियों के भिन्नता के बाद भी पोषित होना, पूर्वांचल की प्राकृतिक स्थिति और अस्त व्यस्त जनजीवन को, निमसी इस उपन्यास की विजयी नायिका है जो अपनी बहन के और माता पिता के लिए विक्रम से अलग तो हुई किंतु विक्र्म के सच्चे प्रेम ने उसे मिनी बनकर शिक्षक, और उसके प्रेम ने विक्रम को वायुसैनिक से इंजीनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया। यह सब इस उपन्यास के विभिन्न दृष्टिकोण है जो इस उपन्यास में रेखांकित किया गया है। अधूरे परन्तु अंतःस्थल के अमर प्रेम, वायुसेनिक के अनुभव, सेना के परे सैनिक की कालजयी मानवीय संवेदनाओं, सियांग घाटी का आखों देखा हाल, सियांग नदी के प्राकृतिक वैभव, निम्बा जनजाति और बौद्ध धर्मानुयाइयों के नजदीक पाठकों को लाने के लिए दयाराम वर्मा जी को बहुत बहुत बधाई।
अनिल अयान;सतना
उपन्यास में दो प्रमुख स्थान हैं जो सियांग नदी के दो तटों पर बसे हैं जिनका नाम क्रमशःमेक्लिंग और नियांमदिंग है। मैक्लिंग में वायुसेना का एयर बेस डेट स्टेशन है जो पहाडी इलाके में बना वायुयानों के उतरने का स्थान है। उपन्यास का नायक विक्रम एयरफोर्स में इसी डेट स्टेशन में वायुसेना के मौसम विशेषज्ञ के रूप में पोस्टिंग में आता है। इसकी नायिका नियामदिंग की मेंबा कबीले की खूबसूरत निमसी है जो विक्रम के संपर्क में मेक्लिंग के स्थानीय रहवासी डे की वजह से आती है। उसके और विक्रम के मिलने की सबसे बड़ी वजह यह भी होती है कि विक्रम की सूरत देबांग से मिलती है जो कुछ वर्ष पहले सियांग नदी के माइक्रोहाइड्रल प्रोजेक्ट में बतौर इंजीनियर आया था और निमसी की बड़ी बहन के साथ उसका प्रेम जब परवान चढ़ा तो शादी के वायदों के बावजूद वह अधूरा रह गया। देवांग के विछॊह में मिनी अपना मानसिक संतुलन खोकर बीमार हो गई। निमसी अपनी बड़ी बहन को सही करने के लिए डे के सहयोग से विक्रम के संपर्क में आती है। वह धीरे धीरे उसके प्रेम में बंधती चली जाती है।
विक्रम को पहले ही दिन से उसके पुराने साथी, मेक्लिंग के बस्ती के लोग, मान्सी नाम की अमीर व्यवसायी, म्योंग दीदी जो हथकरघा उद्योग की सुपरवाइजर थी देव का दूसरा अवतार मानने लगे थे, डे जो मान्सी के वीडीयों हाउस में वीडियो चलाता है, उसकी मदद से विक्रम और निमसी का प्रेम बढ़ता है, वास्तविक रूप से यह प्रेम मिनी और देव की प्रेम कथा से मिनी को मुक्त करके सही करने के उद्देश्य से प्रारंभ होता है किंतु समय गुजरने के साथ निममी निम्मी, और विक्रम विक्की के रूप में नजदीक आजाते हैं, निमसी के निवेदन में विक्रम उसके साथ नियामदिंग,सियांग के उस पार मिनी से मिलने जाता है, इसमें उसके अधिकार मेहनोत्र सर, आर्मी बेस कैंप के राथौड़ सर उसकी काफी मदद करते हैं। मिनी की मौत विक्की के मिलन के बाद हो जाती है,क्योंकि उसे लगता है कि देव उसे मिल गया है, कबीले वालों को यह भ्रम हो जाता है कि विक्की के शरीर में देव की आत्मा ने मिनी को अपनेसाथ ले गई और अब वह निमसी के परिवार को भी नहीं छोड़ेगी, कबीले के मुखिया के आदेश से निमसी और विक्रम अलग हो जाते हैं, विक्रम दो बारा इस पोस्टिंग में अवसाद की वजह से नहीं जाता। विक्रम एयर फोर्स की नौकरी को छोड़ कर देवांग के नाम दूसरा जीवन प्रारंभ करता है, वह देवांग की तरह माइक्रो हाइड्रल प्लांट में इंजीनियर बनकर दोबारा मेक्लिंग जाता है। निमसी मिनी नाम से आगे की पढ़ाई करके वहीं मास्टर हो जाती है।
देवांग उर्फ विक्की जब मेक्लिंग जाता है तो वह मिनी को ढ़ूढ़ने के लिए बस्ती में जाता है उसकी मुलाकात निमसी उर्फ मिनी के बेटे से होती है।उपन्यास का प्रारंभ यहीं से होता है। वह उसके घर में अपने वही पुराने कपडे और हैट देखता है जो उसने निमसी को अंतिम मुलाकात के समय दिया था। उसे यकीन हो जाता है कि वही निमसी है। निमसी उसे ढ़ूढते हुए जब माइक्रो हाइड्रल प्रोजेक्ट के आफिस जाता है तो उसे विक्रम की डायरी मिलती है उसको पढ़ने के बाद उसे पता चलताहै कि वो देवांग नहीं विक्रम है। दोनों कुछ घंटों की मुलाकात में अपने बिछड़ने के बाद की जिंदगी का सारांस एक दूसरे को बता देते हैं। यही से इस उपन्यास का उपसंहार होता है।
इस उपन्यास में डेट कैंप के शंकरन,प्रभु, लोकनाथ, डेविड़ सर, और लोकल कर्म चारी बरुआ, डेविड़ सर के बाद सिन्हा सर का किरदार,शिल्पकेंद्र की पर्यवेक्षक मैड़म डाबा, जैसे सह पात्र उपन्यास को गति देते हैं। उपन्यास ११ भागों में लिखा गया है। इसमें सियांग नदी के हैंगिग पुल, डेट स्टेशन और उसके आस पास की प्राकृतिक स्थितियां, जंगलों में जंगली जानवर मिथुन, जंगलों में अंधेरों में जोकों का सम्राज्य, वौद्ध धर्म स्थल गोम्पा और उसके अनुयाइयों का रहन सहन, वहां पर पहाडो़ं में बसे गांव, घरों की बनावट, बांस में चावल का पकाना, प्रमुख विशेषता है। इस उपन्यास में छद छद्म, बैर,चालाकी, फरेबी जैसे किरदार नहीं है।
इस उपन्यास में भाषा गत परिवर्तन अरुणाचल की मांग थी सर को सार, मीटर को मीतर,आदि. इस उपन्यास में शुरुआत के ५० पृष्ठ में अरुणाचल की सियांग घाटी प्राकृतिक सौंदर्य और उनके रहवासियों का चित्रण है, १७५ पृष्ठ से २२५ पॄष्ठ तक निमसी और विक्रम की पैदल यात्रा है जो सियांग के इस पार से उस पार जाने की तीन दिन की यात्रा का वर्णन है। पूरा उपन्यास एक उपन्यास कम और संस्मरण ज्यादा है। पढ़ते पढ़ते ऐसा महसूस होता है कि विक्रम खुद दयाराम वर्मा ही हैं। जिन्होने अपने जीवन के अनुभवोंको ८० के दशक से उठाकर २०१८ के दशक में पाठकों के सामने लाने की कोशीश की है। अरुणाचल की उस समय पर यातायात और विद्युत समस्याएं, मानवीय प्रेम की भौगोलिक स्थितियों के भिन्नता के बाद भी पोषित होना, पूर्वांचल की प्राकृतिक स्थिति और अस्त व्यस्त जनजीवन को, निमसी इस उपन्यास की विजयी नायिका है जो अपनी बहन के और माता पिता के लिए विक्रम से अलग तो हुई किंतु विक्र्म के सच्चे प्रेम ने उसे मिनी बनकर शिक्षक, और उसके प्रेम ने विक्रम को वायुसैनिक से इंजीनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया। यह सब इस उपन्यास के विभिन्न दृष्टिकोण है जो इस उपन्यास में रेखांकित किया गया है। अधूरे परन्तु अंतःस्थल के अमर प्रेम, वायुसेनिक के अनुभव, सेना के परे सैनिक की कालजयी मानवीय संवेदनाओं, सियांग घाटी का आखों देखा हाल, सियांग नदी के प्राकृतिक वैभव, निम्बा जनजाति और बौद्ध धर्मानुयाइयों के नजदीक पाठकों को लाने के लिए दयाराम वर्मा जी को बहुत बहुत बधाई।
अनिल अयान;सतना
