कहानियों के शिल्प में कराहता कथ्य
अंतहीन यात्रा श्री जगदीश
तोमर का प्रथम कहानी संग्रह है। उम्र के इस पडाव में उन्होने कई कविता संग्रह और उपन्यास
लिखे हैं कई पत्रिकाओं का संपादन करने का भी अनुभव तोमर जी रखते हैं।वर्तमान में प्रेमचंद्र
सृजनपीठ उज्जैन के निदेशक और अध्यक्ष मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा ग्वालियर के रूप
में साहित्य सेवा कर रहे है।उन्होने खुद स्वीकारा है कि कथा साहित्य में अंशकालिक लेखन
कर रहे हैं।अंतहीन यात्रा में शामिल सत्रह कहानियों की यात्रा अंतहीन सी रह गई है।कहानियों
में शामिल अधिक्तर कहानियाँ घटनाओं का वर्णन करती है कथावस्तु और शिल्प के अनुरूप देखें
तो नई मस्जिद ,किस्सा पांडे परिवार का ऐसी कहानियाँ हैंजो समाज की नई सोच को सामने
रखती है उसके अलावा अन्य कहानियाँ कथावस्तु के मामले में कमजोर और कथाशिल्प के मालमे
में काफी प्रभावी हैं।कहानियाँ परिस्थियों का वर्णन करने में सफल तो होती है परन्तु
सुखद परिणाम देने में असमर्थता दिखाती हैं।कहानियों के पात्र बेबाकी से सीधे शब्दों
में अपनी बात कहते नजर आते है।
अपनी अपनी परिधि
में विपुला की परिधि उसे अपनी सहेली से मिल ना पाने के लिये जिम्मेवार है।इधर
बहिस्कार कहानी में एक माँ की बुढापे में कसकती जिंदगी की कहानी हैं।किस्सा
पांडे परिवार का कहानी में बिर्जू के परिवार से अलग रहने की मनोदशा का बखान है।साँझ
के सूरज की तमतमाहट में गुरु की अपने नेता किस्म के शिष्य से मिलन का दृश्य है।चट्टान
की पहली चींख में देवयानी के अपने बीमार पति के साथ बात व्यवहार का वर्णन है।एक
आदमी की फौज में एक प्राईवेट संस्थान में
काम कर रहे एक मुलाजिम के ऊपर होरहे अत्याचार का दृश्य है।मजहब के परे कहानी
में दोनो अलग अलग धर्मों के रिपुसुदन और फूफी जान की मित्रता का वर्णन है\स्कूल
चल रहा है कहानी ,पाक कला की कक्षा आदि में विद्यालयीन और महाविद्यालयीन शिक्षा
का ढकोसला है।अन्य कहानियाँ भी कुछ इसी तरह
की शैली में लिखी गई है।बयानबाजी करती ये कहानियाँ कोई ठोस निष्कर्ष तक पाठक को पहुँचाने
में असमर्थ है।
कहानियाँ पाठकों से बातचीत करती है पर पाठकों को वातावरण में
ही समेट कर रख देती हैं पात्रों का कथावस्तु में गुम हो जाना कहानियों की बहुत छॊटी
कमी हो सकती पर इसका प्रभाव पाठकों पर बहुत
ही नकारात्मक होता है।कहानी के संवाद और भाषा व्यवहारिक और सरल है। घटनायें आसपास नजर
आती है और ऐसा लगता है कि हमारे आसपास ही घटित हो रही है।परन्तु कहानी संग्रह की कई
कहानियाँ अपने पात्रों को एक रिपोर्टनुमा पैरा में कैद करने के लिये विवश है। नई
मस्जिद,मजहव से परे,अंतहीन यात्रा और निष्कासन पीडा को बयान करने में सफल कहानियां
हैं।परन्तु साझ के सूरज की तमतमाहट,एक आदमी की फौज,माया मोह,राजहंस ऐसी कहानियाँ
है जो समाज को पुख्ता संदेश नहीं देती है इन कहानियों के शिल्प में कथ्य कराहता नजर
आता है।विचारों और दर्शन से युक्त कुछ कहानियाँ पाठकों की प्यास को पूर्ण रूपेण शांत
करने में सफल नहीं हो पाती है।परन्तु साहित्य में घटना प्रधान कहानियों का यह संग्रह
गाहे बगाहे जगदीश तोमर जी को आलराउँडर बनाने में सफल होती है।मै उनके उज्जवल भविष्य
की कामना करता हूँ।
अनिल अयान
संपादक शब्द शिल्पी पत्रिका
युवाकथाकार,सतना.
९९९३९३८४७५